vijay vardhana
शुक्रवार, 16 सितंबर 2011
मौसम
वो रात नहीं मेरे प्यार का सबेरा था
जब तेरी जुल्फों में मेरा बसेरा था
अपने इश्क से हो गयी रौशन
जिन गलिओं में कल तलक अँधेरा था
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें